Rajasthan Panchayat Election 2026: राजस्थान पंचायत चुनाव पर बढ़ा सियासी घमासान!

राजस्थान में पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों (Panchayat and Urban Local Body Elections) को लेकर सियासी पारा लगातार बढ़ता जा रहा है। एक तरफ जहाँ राजस्थान हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को 31 जुलाई 2026 तक हर हाल में चुनाव संपन्न कराने के कड़े निर्देश दिए हैं, वहीं दूसरी तरफ तारीखों को लेकर बयानों का दौर शुरू हो गया है। हाल ही में राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष और भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अरुण चतुर्वेदी द्वारा चुनावों को लेकर दिए गए एक बयान ने नए कानूनी और राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है।

क्या है ताजा विवाद?

दरअसल, भीलवाड़ा में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के एक कार्यक्रम के दौरान डॉ. अरुण चतुर्वेदी ने बयान दिया कि प्रदेश में पंचायत और निकाय चुनाव अक्टूबर से दिसंबर 2026 के बीच कराए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार “एक प्रदेश-एक चुनाव” (One State-One Election) की अवधारणा पर काम कर रही है। हालांकि, बाद में उन्होंने यह भी जोड़ा कि चुनाव की तारीखें तय करना राज्य निर्वाचन आयोग (State Election Commission) का काम है।

चतुर्वेदी के इस बयान पर पूर्व विधायक और हाई कोर्ट में इस संबंध में याचिका दायर करने वाले संयम लोढ़ा ने कड़ी आपत्ति जताई है। लोढ़ा ने इसे सीधे तौर पर ‘अदालत की अवमानना’ (Contempt of Court) का मामला बताते हुए चेतावनी दी है कि यदि चतुर्वेदी ने 15 दिनों के भीतर अपना बयान वापस नहीं लिया, तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी। संयम लोढ़ा का कहना है कि एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा ऐसा बयान देना न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने जैसा है।

हाई कोर्ट का सख्त रुख और 31 जुलाई की टाइमलाइन

राजस्थान में स्थानीय चुनाव पिछले काफी समय से लंबित चल रहे हैं। इस मामले से जुड़ी करीब 439 याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने पहले सरकार को 15 अप्रैल 2026 तक चुनाव कराने का समय दिया था। लेकिन सरकार ने ओबीसी आरक्षण प्रक्रिया और आयोग की रिपोर्ट का हवाला देकर अतिरिक्त समय की मांग की।

अदालत ने सरकार की अर्जी को स्वीकार करते हुए नई और अंतिम डेडलाइन 31 जुलाई 2026 तय की है। हाई कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं के चुनावों को अनिश्चितकाल के लिए नहीं टाला जा सकता और ओबीसी आयोग की रिपोर्ट में हो रही देरी चुनाव रोकने का बहाना नहीं बन सकती। कोर्ट ने ओबीसी आयोग को भी 20 जून 2026 तक अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा था।

चुनाव टालने के आरोपों पर पक्ष-विपक्ष आमने-सामने

इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजस्थान की सियासत गरमाई हुई है:

  • विपक्ष का आरोप: कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का आरोप है कि भाजपा सरकार जानबूझकर जमीनी स्तर पर अपनी राजनीतिक पकड़ कमजोर होने के डर से स्थानीय चुनावों को आगे खिसका रही है। विपक्ष का कहना है कि “वन स्टेट-वन इलेक्शन” का हवाला देकर जानबूझकर देरी की जा रही है।

  • सरकार का पक्ष: वहीं सत्ता पक्ष का तर्क है कि बिना ओबीसी आरक्षण (OBC Reservation) की प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से पूरा किए चुनाव कराना कानूनी रूप से सही नहीं होगा, इसलिए आयोग पूरी मुस्तैदी से काम कर रहा है।

जनता को अभी भी आधिकारिक तारीखों का इंतजार

भले ही राजनीतिक गलियारों में अक्टूबर-दिसंबर की चर्चाएं शुरू हो गई हों, लेकिन तकनीकी और कानूनी रूप से सरकार हाई कोर्ट के 31 जुलाई के आदेश से बंधी हुई है। राज्य निर्वाचन आयोग की तरफ से अभी तक चुनाव शेड्यूल (Official Notification) को लेकर कोई अंतिम घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार अदालत के तय समय के भीतर चुनाव कराती है या यह कानूनी लड़ाई आगे खिंचती है।

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