उत्तराखंड के बाद अब राजस्थान में भी समान नागरिक संहिता (UCC) को धरातल पर उतारने की कवायद तेज हो गई है। भजनलाल सरकार ने सूबे में ‘राजस्थान यूनिफॉर्म सिविल कोड-2026’ का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन कर दिया है। इस विशेष कमेटी की कमान सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई को सौंपी गई है।
गौरतलब है कि अप्रैल माह में हुई कैबिनेट बैठक में राज्य सरकार ने यूसीसी के प्रस्ताव पर सैद्धांतिक मंजूरी दे दी थी, जिसके बाद अब कमेटी का गठन कर इस दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया गया है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस कदम के जरिए भाजपा अपने कोर वैचारिक एजेंडे और चुनावी वादों को पूरा करने का एक मजबूत संदेश दे रही है।
प्रस्तावित कानून से आम जनता पर क्या होगा असर?
यदि राजस्थान में यूसीसी कानून लागू होता है, तो नागरिकों के व्यक्तिगत मामलों जैसे विवाह, तलाक, संपत्ति और उत्तराधिकार से जुड़े नियमों में आमूल-चूल बदलाव देखने को मिलेंगे। मुख्य रूप से निम्नलिखित क्षेत्रों पर इसका सीधा असर पड़ेगा:

1. एक से अधिक विवाह पर पूर्ण रोक
नए कानून के तहत प्रदेश में रहने वाले सभी नागरिकों के लिए एक विवाह (Monogamy) का नियम अनिवार्य हो जाएगा। किसी भी धर्म या व्यक्तिगत कानून (Personal Law) के तहत अब एक से ज्यादा शादी करने की अनुमति नहीं होगी।
2. शादी और तलाक का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में होने वाली सभी शादियों का कानूनी पंजीकरण (Registration) कराना जरूरी होगा। वर्तमान में केवल सामाजिक या धार्मिक रीति-रिवाजों से होने वाली शादियों का कोई पुख्ता सरकारी रिकॉर्ड नहीं होने से बाद में कानूनी विवाद खड़े होते हैं। नए नियम से तलाक और भरण-पोषण (Alimony) की प्रक्रिया भी एक समान और पारदर्शी हो जाएगी।
3. बेटा-बेटी को संपत्ति में एक समान अधिकार
पैतृक संपत्ति के उत्तराधिकार को लेकर नए कानून में स्थिति और स्पष्ट की जाएगी। सामाजिक अनिच्छा के बावजूद, व्यवहारिक तौर पर बेटा और बेटी दोनों को पैतृक संपत्ति में बराबर का कानूनी हकदार माना जाएगा, जिससे महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

4. लिव-इन रिलेशनशिप के लिए कड़े नियम
प्रस्तावित मसौदे में लिव-इन पार्टनरशिप को भी कानूनी दायरे में लाने की तैयारी है। ऐसे रिश्तों में रहने वाले जोड़ों के लिए प्रशासन के पास रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य किया जा सकता है। सरकार का तर्क है कि इससे महिलाओं और ऐसे संबंधों से पैदा होने वाले बच्चों के अधिकारों की रक्षा होगी।
परंपराओं और कानून के बीच संतुलन की बड़ी चुनौती
राजस्थान अपनी सांस्कृतिक और सामाजिक विविधता के लिए जाना जाता है। सदियों से चली आ रही अलग-अलग समुदायों की प्रथाओं के बीच एक समान कानून लागू करना कमेटी के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी।
जनजातीय समुदायों को मिल सकती है छूट:

सरकार ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि राजस्थान के आदिवासी और जनजातीय समुदायों की पारंपरिक रीति-रिवाजों और उन्हें मिले संवैधानिक संरक्षण को बरकरार रखा जाएगा। ऐसे में संभव है कि कुछ विशेष समुदायों को इस कानून के दायरे से बाहर रखा जाए, जिससे राजस्थान में यूसीसी का स्वरूप उत्तराखंड से थोड़ा अलग नजर आ सकता है।
समिति अब सभी पक्षों, कानूनी विशेषज्ञों और आम जनता के सुझावों को ध्यान में रखते हुए ड्राफ्ट तैयार करेगी, जिसके बाद इसे विधानसभा में विधेयक के रूप में पेश किया जाएगा।








